Energies, Positive, Negative & 7 Chakras, शरीर की ऊर्जा, सकारात्मक, नकारात्मक और 7 चक्रों का रहस्य
इसका सीधा संबंध आपके शरीर की ऊर्जा (Energy), चक्रों (Chakras) और औरा (Aura) से है। आइए समझते हैं कि यह पूरा विज्ञान कैसे काम करता है।
1. ऊर्जा सकारात्मक या नकारात्मक कब और कैसे होती है?
ब्रह्मांड की तरह हमारा शरीर भी पूरी तरह ऊर्जा से बना है।
- सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy): जब हमारे विचार शुद्ध होते हैं, भावनाएं संतुलित होती हैं, और हम मानसिक व शारीरिक रूप से स्वस्थ होते हैं, तो शरीर में ऊर्जा का प्रवाह सही दिशा में होता है। इसे हम सकारात्मक ऊर्जा कहते हैं।
- नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy): अत्यधिक तनाव, ईर्ष्या, गुस्सा, गलत खान-पान या नकारात्मक माहौल के कारण यह ऊर्जा ब्लॉक (बाधित) हो जाती है। जब ऊर्जा का यह प्राकृतिक प्रवाह असंतुलित जाता है, तो वह नकारात्मकता में बदल जाती है, जिससे मानसिक और शारीरिक असंतुलन व बीमारियां उत्पन्न होती हैं।
2. चक्रों का असंतुलन: ऊर्जा बिगड़ने का मुख्य कारण
हमारे शरीर में 7 मुख्य ऊर्जा केंद्र होते हैं, जिन्हें चक्र (Chakras) कहा जाता है। ये रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से से लेकर सिर के शीर्ष तक स्थित होते हैं। जब ऊर्जा का असंतुलन होता है तो इसका प्रभाव शरीर के चक्रों पर भी पड़ता है।
- एक या अधिक चक्रों का असंतुलन: यदि इनमें से कोई भी एक चक्र ब्लॉक या असंतुलित (Imbalanced) हो जाए, तो उस हिस्से से जुड़ी शारीरिक और मानसिक ऊर्जा प्रभावित होती है।
- उदाहरण के लिए: यदि आपका 'मूलाधार चक्र' (Root Chakra) असंतुलित है, तो आप हमेशा असुरक्षा और डर महसूस करेंगे। यदि 'अनाहत चक्र' (Heart Chakra) ब्लॉक है, तो रिश्तों में कड़वाहट आने लगती है। इसलिए, चक्रों का संतुलित होना सकारात्मक ऊर्जा के लिए अनिवार्य है।
3. औरा (Aura) क्या है और यह क्यों जिम्मेदार है?
हाँ, चक्रों के साथ-साथ औरा (आभामंडल) भी इसके लिए पूरी तरह जिम्मेदार है।
औरा क्या है? हमारा शरीर अपने चारों ओर एक अदृश्य ऊर्जा का कवच (Energy Field) बनाता है, जिसे 'औरा' कहते हैं। यह आपके विचारों, चक्रों की स्थिति और आंतरिक स्वास्थ्य का आईना होता है।
जब ऊर्जा और चक्रा प्रभावित होते है तो इसका निश्चित प्रभाव औरा (Aura) पर पड़ता है।
- सुरक्षा कवच: एक मजबूत औरा बाहरी नकारात्मक शक्तियों या नजर दोष से आपकी रक्षा करता है।
- कमजोर औरा का नुकसान: यदि ऊर्जा और चक्र असंतुलित हैं, तो औरा कमजोर हो जाता है या ऊर्जा के प्रवाह मे विकृति उत्पन्न हो जाती है उसमें 'होल्स' (छिद्र) हो जाते हैं। इसके कारण बाहरी नकारात्मक ऊर्जाएं शरीर में आसानी से प्रवेश कर जाती हैं, जिससे जल्दी बीमार या मानसिक रूप से परेशान होने लगते हैं।
कैसे जानें चक्रों और औरा की स्थिति?
ऊर्जा, चक्र और औरा अदृश्य हैं, लेकिन इन्हें आधुनिक तकनीक से मापा जा सकता है। हमारे केंद्र पर हम इलेक्ट्रॉनिक डाउज़र स्कैनर (Electronic Dowsing Scanner) की मदद से चक्रों की ऊर्जा और औरा की सटीक स्कैनिंग करते हैं, व साथ मे उसका निवारण भी।
इस स्कैनिंग से यह साफ पता चल जाता है कि:
- कौन सा चक्र ब्लॉक या असंतुलित है?
- औरा और शरीर ऊर्जा सकारात्मक है या नकारात्मक है?
- आपकी वर्तमान समस्याओं (जैसे शरीर, स्वास्थ्य या रिश्ते) के पीछे कौन सी ऊर्जा जिम्मेदार है?
निष्कर्ष: यदि आप भी अपने जीवन में लगातार रुकावटें या नकारात्मकता महसूस कर रहे हैं, तो आज ही अपने औरा और चक्रों की स्कैनिंग कराएं और ज्योतिषीय व ऊर्जा उपचार (Healing) के माध्यम से अपनी सकारात्मकता को वापस पाएं।
♈ ♉ ♊ ♋ ♌ ♍ ♎ ♏ ♐ ♑ ♒ ♓
शरीर के सभी 7 चक्रों का, उनके स्वस्थ (संतुलित) और अस्वस्थ (असंतुलित) होने पर शरीर, मन और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों का विस्तृत विवरण दिया गया है।
1. मूलाधार चक्र (Root Chakra)
- स्थान: रीढ़ की हड्डी का सबसे निचला हिस्सा (Tailbone)
- तत्व: पृथ्वी (Earth)
- संबंधित शारीरिक अंग: पैर, हड्डियां, दांत, मलाशय (Rectum), प्रतिरक्षा प्रणाली (Immunity)।
- स्वस्थ चक्र के परिणाम (संतुलित होने पर):
- व्यक्ति खुद को सुरक्षित, स्थिर और जमीन से जुड़ा हुआ महसूस करता है।
- जीवन में भरपूर आत्मविश्वास और जीने की इच्छा होती है।
- वित्तीय स्थिति और करियर को लेकर स्थिरता का अहसास होता है।
- अस्वस्थ चक्र के परिणाम (असंतुलित होने पर):
- मन पर प्रभाव: हमेशा अनजाना डर, असुरक्षा की भावना, डिप्रेशन, और भविष्य को लेकर चिंता बनी रहती है।
- शरीर/रोग: पैरों और घुटनों में दर्द, रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से में दर्द (Sciatica), कब्ज (Constipation), मोटापा या अत्यधिक वजन कम होना, और थकान।
2. स्वाधिष्ठान चक्र (Sacral Chakra)
- स्थान: नाभि से लगभग दो इंच नीचे
- तत्व: जल (Water)
- संबंधित शारीरिक अंग: प्रजनन अंग (Reproductive Organs), गुर्दे (Kidneys), मूत्राशय (Bladder), बड़ी आंत।
- स्वस्थ चक्र के परिणाम (संतुलित होने पर):
- व्यक्ति रचनात्मक (Creative) होता है और जीवन का आनंद लेता है।
- भावनाओं पर पूरा नियंत्रण होता है और रिश्तों में मधुरता बनी रहती है।
- कामुकता और इच्छाओं का स्वस्थ संतुलन होता है।
- अस्वस्थ चक्र के परिणाम (असंतुलित होने पर):
- मन पर प्रभाव: रचनात्मकता खत्म हो जाना, हर समय अपराध बोध (Guilt) महसूस करना, बहुत ज्यादा भावुक हो जाना या भावनाओं का शून्य हो जाना।
- शरीर/रोग: पीसीओडी/पीसीओएस (PCOD/PCOS), बांझपन या नपुंसकता (Infertility), यूरिन इन्फेक्शन (UTI), गुर्दे की पथरी (Kidney Stones), और पीठ के निचले हिस्से में अकड़न।
3. मणिपुर चक्र (Solar Plexus Chakra)
- स्थान: नाभि के ठीक पीछे (पेट का ऊपरी हिस्सा)
- तत्व: अग्नि (Fire)
- संबंधित शारीरिक अंग: पाचन तंत्र (Digestive System), लिवर, पेट, प्लीहा (Spleen), पित्ताशय (Gallbladder)।
- स्वस्थ चक्र के परिणाम (संतुलित होने पर):
- इच्छाशक्ति (Willpower) बहुत मजबूत होती है और व्यक्ति साहसी होता है।
- उच्च आत्म-सम्मान (Self-esteem) और नेतृत्व क्षमता (Leadership Quality) विकसित होती है।
- सही समय पर सही निर्णय लेने की क्षमता होती है।
- अस्वस्थ चक्र के परिणाम (असंतुलित होने पर):
- मन पर प्रभाव: अत्यधिक गुस्सा आना, अहंकार बढ़ जाना, खुद को दूसरों से कमतर आंकना या बहुत ज्यादा कंट्रोलिंग व्यवहार होना।
- शरीर/रोग: गैस, एसिडिटी, कब्ज, पेट में अल्सर, डायबिटीज (मधुमेह), लिवर से जुड़ी बीमारियां, और कमजोर पाचन क्रिया।
4. अनाहत चक्र (Heart Chakra)
- स्थान: छाती के बीचो-बीच (हृदय चक्र)
- तत्व: वायु (Air)
- संबंधित शारीरिक अंग: हृदय (Heart), फेफड़े (Lungs), छाती, रक्त परिसंचरण (Blood Circulation), थाइमस ग्रंथि।
- स्वस्थ चक्र के परिणाम (संतुलित होने पर):
- व्यक्ति के भीतर बिना शर्त प्रेम, करुणा और दया की भावना होती है।
- दूसरों को आसानी से माफ करने की क्षमता आती है।
- रिश्तों में गहरा जुड़ाव और शांति महसूस होती है।
- अस्वस्थ चक्र के परिणाम (असंतुलित होने पर):
- मन पर प्रभाव: अकेलापन महसूस होना, किसी पर भरोसा न कर पाना, दिल टूटने का गम (Heartbreak) न भूल पाना, और ईर्ष्या या नफरत की भावना।
- शरीर/रोग: दिल का दौरा (Heart Attack), हाई या लो ब्लड प्रेशर, अस्थमा (Asthma), फेफड़ों में इन्फेक्शन, और छाती में जकड़न।
5. विशुद्ध चक्र (Throat Chakra)
- स्थान: गले में (कंठ)
- तत्व: आकाश (Space/Ether)
- संबंधित शारीरिक अंग: गला, थायराइड ग्रंथि (Thyroid), आवाज, वोकल कॉर्ड, जबड़ा, कान।
- स्वस्थ चक्र के परिणाम (संतुलित होने पर):
- व्यक्ति की वाणी मधुर, स्पष्ट और प्रभावशाली होती है।
- अपनी बात को बिना डरे और सच्चाई से दूसरों के सामने रखने की कला आती है।
- एक अच्छा श्रोता (Good Listener) बनना।
- अस्वस्थ चक्र के परिणाम (असंतुलित होने पर):
- मन पर प्रभाव: अपनी बात न कह पाना, झूठ बोलना, अत्यधिक गॉसिप (बुराई) करना, या हर बात में चुप रह जाना (Express न कर पाना)।
- शरीर/रोग: थायराइड की समस्या (Hyper/Hypothyroidism), गले में खराश, टॉन्सिल्स, हकलाना, जबड़े में दर्द, और कान से जुड़ी समस्याएं।
6. आज्ञा चक्र (Third Eye Chakra)
- स्थान: दोनों भौहों के बीच (माथे पर)
- तत्व: प्रकाश / मन (Light)
- संबंधित शारीरिक अंग: पीनियल और पिट्यूटरी ग्रंथि, आंखें, मस्तिष्क (Brain), तंत्रिका तंत्र (Nervous System)।
- स्वस्थ चक्र के परिणाम (संतुलित होने पर):
- अंतर्ज्ञान (Intuition/Sixth Sense) बहुत तीव्र हो जाता है।
- मानसिक स्पष्टता, दूरदर्शिता और गहरी सोच विकसित होती है।
- व्यक्ति को आने वाली घटनाओं का पूर्वाभास होने लगता है।
- अस्वस्थ चक्र के परिणाम (असंतुलित होने पर):
- मन पर प्रभाव: मानसिक भ्रम (Confusion), एकाग्रता की कमी, बुरे सपने आना, अध्यात्म पर अविश्वास, और जिद या संकीर्ण सोच।
- शरीर/रोग: माइग्रेन या तेज सिरदर्द, आंखों की कमजोरी, साइनस (Sinus), न्यूरोलॉजिकल समस्याएं (नसों की बीमारी), और अनिद्रा (Insomnia)।
7. सहस्रार चक्र (Crown Chakra)
- स्थान: सिर के सबसे ऊपरी हिस्से पर (चोटी का स्थान)
- तत्व: तत्व से परे (Cosmic Energy)
- संबंधित शारीरिक अंग: मस्तिष्क की छाल (Cerebral Cortex), केंद्रीय तंत्रिका तंत्र, संपूर्ण शरीर की ऊर्जा।
- स्वस्थ चक्र के परिणाम (संतुलित होने पर):
- व्यक्ति का परमात्मा या ब्रह्मांडीय ऊर्जा से सीधा जुड़ाव महसूस होता है।
- परम शांति, आत्मज्ञान (Enlightenment) और उच्च चेतना की प्राप्ति होती है।
- भौतिक दुनिया से मोह कम और आत्मिक आनंद अधिक मिलता है।
- अस्वस्थ चक्र के परिणाम (असंतुलित होने पर):
- मन पर प्रभाव: ईश्वर या किसी भी शक्ति पर विश्वास न होना, अत्यधिक नास्तिकता, खुद को सबसे अलग-थलग महसूस करना, या बहुत ज्यादा भ्रमित रहना।
- शरीर/रोग: मानसिक बीमारियां (जैसे सिज़ोफ्रेनिया, डिमेंशिया), क्रोनिक थकान (हमेशा थका रहना), प्रकाश या ध्वनि के प्रति संवेदनशीलता, और मस्तिष्क से जुड़े विकार।
स्कैनिंग करवाने के दो आसान तरीके है, एक स्वयं उपस्थित होकर और दूसरा अपना latest (नवीनतम) फ़ोटो, लाइट कलर के बैकग्राउंड या दिवाल के सामने खड़े होकर मोबाईल अथवा कैमरा से खींचकर whatsapp करे।
स्कैनिंग मे ऊर्जा, चक्रा, के अलावा भी नव ग्रह, लाभदायक रत्न-उपरत्न, पहना हुआ रत्न, धातु, रंग, दवाई, शुभ-अशुभ, वास्तु, वास्तु से अपनी ऊर्जा का मिलान, व्यक्ति से व्यक्ति का मिलान, इत्यादि अनेक चीजों की जाँच कर सकते है।
सकारात्मक-नकारात्मक ऊर्जा, औरा, चक्रा के प्रभाव अथवा पहलू
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